याद
नादान दिल हमारा था हम अपने ही दिल से हारे थे। आवाज न थी जुबां में मेरी हम दिल से तुझे पुकारे थे। नादान....हारे ...... कुर्बान हुई जब नींद हमारी आंखो ने अश्क बहाए थे। पाने को तेरी चाहत में हम मंदिर भी हो आए थे। मिल जाती अगर यूं ही हम अहमियत भूल जाते । दो बाते मीठी करके सायद कल खो जाते । एक दोस्त नहीं दुनिया हो मेरी एक पहचान बना दो ना। बेशक उड़ना तुम आसमां में मुझे बस एक मांझा बना लो ना।