टू चाइल्ड पॉलिसी आखिर क्यों??
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए "टू चाइल्ड पॉलिसी"का आवाहन किया है उनका कहना है की दो बच्चे से अधिक बच्चा पैदा करने पर सरकारी नौकरी नहीं मिल पाएगी और न ही सरकारी सेवाओं का लाभ मिल पाएगा ।
क्या सरकार ऐसा फैसला लेके समाज पर दबाव बनाना चाहती है?
या चुनाव करीब होने गुमराह करना चाहती है ?
या बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई को छुपाने के लिए सरकार जनसंख्या को दोष दे रही है?
उत्तर प्रदेश में चुनाव जैसे जैसे करीब आ रहा है योगी जी का तो मूड ही चेंज होता जा रहा है 😇
आपको बता दे आज का बेरोजगारी और महंगाई सबको एक जनसंख्या के प्रति सबक बन गई है ।
पढ़ा लिखा इंसान छोटा परिवार ही चाहता है क्युकी वह अपना अतीत अपने बच्चे में देखना नहीं चाहता है।
अच्छा स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए छोटा परिवार होना बहुत जरूरी है और देखा भी गया है की शिक्षित परिवार में छोटी फैमिली ही है। लेकिन आज भी हमारे भारत में ऐसे कई गांव कस्बे है जहा शिक्षा मतलब "हस्ताक्षर"करना समझते है। अथवा उच्च शिक्षा या रोजगारयुक्त शिक्षा इतना महंगी है की वे ग्रहण कर नही पाते। जिससे वहा शिक्षा उतना नहीं मिल पाता जितना मिलना चाहिए। शरीर लंबाई देखकर , समाजिक दबाव में आकर जल्दी शादी कर लेते है जिससे जनसंख्या में वृद्धि होती है ।
गांव में आज भी बिजली चौबीस घंटे में चार घंटे ही रहती है जिससे गांव में मनोरंजन के साधन है वह अपने परिवार और बच्चे के साथ ही समय व्यतीत करते है ।
वर्तमान में बेरोजगारी चरमसीमा पर है ।
महंगाई आसमान छू रही है ।
शिक्षा का स्तर गिर रहा है ।
फिर भी सरकार को ये चीज दिखाई नहीं दे रही है।
शायद नियंत्रण से बाहर है या सरकार अपनी कमियों को छुपाना चाहती हैं।
लेखक
धानू कुमार गौतम।

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