15 AUGUST 2021
आजादी के हम परवाने है
इतिहास हमे बताता है।
भारत की कुर्बानी का
अहसास हमे दिलाता है!
परतंत्रता की बेड़ियों ने
लहू में एक चिंगारी दी थी।
जीवन से कही ज्यादा
मौत उसने प्यारी थी।
संगठित हुए,
सहादत का शिकार हुए।
जब जाके नरम और गरम
दो दल तैयार हुए।
जुल्मों के जालिमआत्मा को
जब उन्होंने झकझोर दिए
रंजीशे गुलामी बेड़ियां को
जब निहथो ने तोड़ दिए
परतंत्र शाही पहनावा छोड़
स्वदेशी को एक मोड़ दिया था
मानो शेर को लोमड़ी बना
शेर के ही खाल कोई छोड़ दिया था।
आखिरकार जब अंग्रेजों का
भारत से नाता टूट रहा था ।
जीवन की शैली का उनके
कई कड़िया छूट रहा था ।
जब बजा बिगुल आजादी का
भारत ने जश्न मनाया था
दिल्ली वाले लाल किले पर
पहली बार,
तिरंगा फहराया था।
धानु कुमार.......
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